Skip to main content

20-11-18

Radha sadho, guru sadho, sadho shiv ka naam
Raam raam japte japte sadh jate  sab  kaam



Teri hi aas me, Teri hi pyas me, firte dar badar
Girte uthte, uthke girte, rage Teri Chan me is कदर
Maut na aayi, na tu aya, virah ki vela me dil ghabraya
Na jindagi maani, na maut Mani, bin tere  na koi kinara
Preet ki reet  yahi, yaha sirf  tu h tere  बिना ना कोई सहारा


Comments

Popular posts from this blog

Guru kripa ki prarthna

 गुरु की आस में , गुरु  के ज्ञान से गुरु  की आराधना से, गुरु के उपकार से  जीवन का हर क्षण साधनामय हो इसी विनती के साथ आज मैं इस लेखन का आरम्भ कर रही हूँ  गुरु को समर्पित, गुरु की इच्छा , गुरु की वाणी , गुरु का ध्यान  जय गुरुदेव , जय माँ , पारवती वल्लभा

Vipulji ke btae niyam

कुछ नियम बनाये है। 1 हमेशा सहायता के लिए ततपर रहो। उंसक बदला न सोंचो न मांगो। 2 जिस कार्य मे तुम्हारा नुकसान नही परन्तु अन्य का फायदा हो कर दो। 3 कभी झूठ न बोलो। यदि तुम्हारी जान को माल को या जॉब को खतरा हो। वहाँ झूठ का सहारा मजबूरी में लो। 4 कभी क्या होगा चिंता मत करो। बस कर्म करो और भूल जाओ। 5 मस्त रहो। व्यस्त रहो। अस्त व्यस्त मत रहो।। 6 कभी खाली न बैठो। समय हो तो पढो नही तो मन्त्र जप करो। नहीं तो ध्यान करते हुए सो जाओ। 7 रात्रि सोने के पहले ईश की आरती अवश्य करो। चाहे कितनी रात क्यो न हो जाये। 8 अनावश्यक ज्ञानी गुरु प्रवचक महान बनने की भावना से दूर रहो। 9 हो सके तो प्रभु को समर्पित हो जाओ। 10 जो अंदर हो वो बाहर दिखो। नकली चेहरा चापलूसी से दूर रहो। यदि किसी का कल्याण हो तो उसे स्पष्ट बोल दो। पर अहंकारी को नहीं। 11 साधु संत गुरुओं और गेरुआ वस्त्र का सम्मान करो पर अंध भक्त न बनो। नकली भी हो सकता है। 12 स्वस्थ्य रहने हेतु नींद पूरी लो। 🙏🙏🙏🙏🙏

Practice part 3

भाग-3          मानव तन विज्ञान                 (  प्रेक्टीश )                    --गगनगीरीजी महाराज         जैसे हमने दुसरे भाग मे स्थूळ जगत की सिध्धिओ के बारे मे बात किया ये है प्रेक्टीश की थियरी सुक्ष्म जगत के लिए स्थायी है. स्थूळ जगत की सारी सिध्धियां ये कौनसे तरीके से हांसल होती है ये बात का दुसरे भाग मे चर्चा किया है तो अब ये तिसरे भाग मे सुक्ष्म जगत की सिध्धियां और अनुभव कैसे हांसल होता है ये बात हम करेंगे.                  जैसे स्थूळ जगत की सिध्धियां हांसल होती हैं वो ही तरीके से सुक्ष्म जगत की सिध्धियां हांसल होती है दोनो जगत मे तरीका एक ही है लेकिन सुक्ष्म जगत के लिए प्रेक्टीश का समय थोडा लंबा है और स्थूळ जगत की सिध्धियां के लिए प्रेक्टीश का समय पिरियड टुंका है ईतना तफावत है. आध्यात्मिक क्षेत्र के लिए परमात्मा तक पहुंचने के लिए परमात्मा का अनुभव करने के लिए योगक्रिया करनी पडती है. योगक्र...