|| अथ प्रथभोऽध्या य || अचिन्त्व्याव्यक्तरूपाय निर्गुणाय गुणात्मने | समस्त जगदाधारमूर्तये ब्रह्मणे नमः || पहला अध्याय जो ब्रह्म अचिंत्य , अव्यक्त , तीनों गुणों से रहित (फिर भी देखनेवालों के अज्ञान की उपाधि से) त्रिगुणात्मक और समस्त जगत का अधिष्ठान रूप है ऐसे ब्रह्म को नमस्कार है | (1)
Guru brahma guru vishnu guru sakshat parbrahm tasme shri guruve namah Itni koshish ke baad bhi sanshay kyu aa jata h man me Kriya ke vishay me kuch btae Aajkal dhyan me baith nahi pati islie kriya nahi hoti Ajeeb sa mud ho jata h Fir bhatakane shuru ki ye mantra karu ya wo mantra karu Ye chodu use pakdu ye zyada asardar ye kamzor In sab vicharo se kaise bache Achanak bhav ata h ki in sabse upar utho nirvichar raho, sab illusions hi h aur kuch nahi Guru charno pe atut shradha n guru mantra me atut vishwas hi ek matra sadhan h sansar sagar se paar pane ka सोने के पहले माँ का सम्पुट पढ़ ले। दुर्गा देवी नमातुभ्य सर्वाकामार्थ साधिके। मम सिद्धिम सिद्धिम व स्वप्ने सर्व प्रदर्शय:।। यदि विष्णु मन्त्र एक हफ्ते में असर न दिखाई तो बजरंग बाण संकल्प के साथ सुबद शाम 21 दिन पढ़े या जब तक फायदा न हो पढ़ते रहे। संख्या अधिक होने में परहेज नही। ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः Aum Aing Saraswathye Namah Aum माले माले महामाले स...
गुरु की आस में , गुरु के ज्ञान से गुरु की आराधना से, गुरु के उपकार से जीवन का हर क्षण साधनामय हो इसी विनती के साथ आज मैं इस लेखन का आरम्भ कर रही हूँ गुरु को समर्पित, गुरु की इच्छा , गुरु की वाणी , गुरु का ध्यान जय गुरुदेव , जय माँ , पारवती वल्लभा